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Welcome to the Jungle Review: क्या वाकई देखने लायक है ये फिल्म? जानें पूरा हाल

Welcome to the Jungle Review: क्या वाकई देखने लायक है ये फिल्म? जानें पूरा हाल

Movie: Welcome to the Jungle (Welcome 2)  Director: Ahmed Khan 

🎬 Welcome to the Jungle (Welcome 3)

Director: Ahmed Khan

🎭 Cast Akshay Kumar (Double Role), Suniel Shetty, Paresh Rawal, Arshad Warsi, Jackie Shroff, Krishna Abhishek, Kiku Sharda, Disha Patani, Jacqueline Fernandez and an army of 34 actors.
🎬 Genre Comedy / Satire
⏱ Duration 2 Hours 25 Minutes
⭐ Our Verdict

ठीक-ठाक टाइमपास, पर ‘Welcome’ की लिगेसी के हिसाब से कमज़ोर।

अक्सर हम सोचते हैं कि कोई फिल्म अगर बुरी हो तो कम से कम ‘सो बैड इट्स गुड’ तो होनी चाहिए। लेकिन ‘Welcome to the Jungle’ देखने के बाद एक नई कैटेगरी का पता ‘सो एवरेज इट्स फनी-इश’। अहमद खान की ये फिल्म न आपको पूरी तरह हंसा पाती है और न ही आपका दिमाग खराब करती है। यूं कहें कि ये वही ‘हल्का-फुल्का’ कॉमेडी का वादा करती है, लेकिन एक्ज़ीक्यूशन में ‘हल्का’ ही रह जाती है।

हमने ये रिव्यू लिखने से पहले दो बेहतरीन YouTube रिव्यूअर्स की वीडियो देखी हैं। एक हैं Yogi Bolta Hai जिनका एनालिसिस हमेशा कमाल का होता है और दूसरी वीडियो एक चर्चित चैनल से है जिसने फिल्म की टेक्निकल खामियों पर खूब रोशनी डाली। दोनों की इनसाइट्स से हमें ये रिव्यू तैयार करने में मदद मिली – और अब हम आपको वो सब बता रहे हैं जो जानना ज़रूरी है।

 कहानी का ‘जुगाड़’ – टैक्स बचाने के लिए बन रही है सबसे बेकार फिल्म

कहानी का बेसिक आइडिया ही आपको बता देता है कि मेकर्स ने अपना दिमाग घर पर ही छोड़ दिया था। एक कारोबारी (शायद किसी न किसी एक्टर ने प्ले किया हो) पर भारी टैक्स का बोझ है। टैक्स बचाने का सबसे ‘स्मार्ट’ तरीका? एक फ्लॉप फिल्म बनाओ और उसका खर्च दिखाकर सारा पैसा सेव कर लो। इसके लिए वो चंद स्ट्रगलिंग एक्टर्स और अनजान चेहरों की एक टीम बनाता है और उन्हें बॉर्डर के पार (पीओके जैसी लोकेशन) एक मूवी की शूटिंग के बहाने भेज देता है। फिल्म के अंदर फिल्म का ये ताना-बाना कुछ ऐसा उलझता है कि एक्टर्स नकली फ़ौजी बनकर असली मुजाहिदीनों के बीच फंस जाते हैं। अब लाइफ में कॉमेडी है या ट्रेजेडी, ये खुद फिल्म को भी तय नहीं।

दूसरे रिव्यूअर के मुताबिक, पहले हाफ में ये ‘फ़ेक फ़िल्म शूट’ वाला कॉन्सेप्ट थोड़ा इंट्रेस्टिंग लगता है लेकिन हंसी नहीं आती। इंटरवल के आसपास और सेकेंड हाफ में कॉमेडी का ग्राफ़ ऊपर जाता है। लेकिन सवाल ये है कि एक कॉमेडी फिल्म में पूरा एक घंटा बिना हंसे काटना पड़े, तो मज़ा क्या?

 अक्षय कुमार – पुराने ‘कॉमेडी किंग’ की एक झलक

इस फिल्म का सबसे बड़ा सेलिंग पॉइंट है अक्षय कुमार का डबल रोल। एक तरफ वो ‘जुगाड़ू’ किस्म का शख्स हैं तो दूसरी तरफ रौबदार। दोनों किरदार जब आमने-सामने आते हैं, तो वो ट्विस्ट वाकई मज़ेदार है और आपको खिलाख़िड़ देता है। Yogi Bolta Hai के मुताबिक, अक्षय अपने ‘पीक कॉमेडी स्टाइल’ में लौट आए हैं और उनका कॉमिक टाइमिंग अब भी बेजोड़ है। फिल्म का एक सीन – जिसमें वो माथे पर ‘टीका’ लगाते हैं और जो होता है – आपको ज़रूर हंसा देगा।

पर अफ़सोस कि पूरी फिल्म में ऐसे मौके चंद ही हैं। एक रिव्यूअर ने बताया कि उन्हें 2.5 घंटे में बमुश्किल चार-पांच बार हंसी आई। इतने सारे कॉमेडियन होने के बावजूद फिल्म के जोक्स ऐसे लगते हैं जैसे पुराने हंसी के पिटारे से उधार लिए गए हों।

 कास्टिंग का ‘भूचाल’ – 34 एक्टर्स पर कोई छा नहीं पाया

वेलकम टू द जंगल का कास्ट एक मिनी-इंडस्ट्री जैसा है। सुनील शेट्टी, परेश रावल, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा – ये सब हैं। पर जब आपके पास इतने दिग्गज हों और किसी को भी पर्याप्त स्क्रीन टाइम न मिले, तो मज़ा किरकिरा हो जाता है। जैकी श्रॉफ जैसे एक्टर का काम देखकर लगता है कि वो सेट पर आए, चाय पी और चले गए। कृष्णा अभिषेक और कीकू शारदा जैसे टैलेंटेड लोगों को इतना कम यूज़ करना अपराध है। दोनों रिव्यूअर्स इस बात से सहमत हैं कि “भीड़ में हीरो खो गए।”

वहीं एक्ट्रेसेस – दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडीज़ – का रोल सिर्फ ग्लैमर एड करना है। फिल्म खुद एक सीन में इस बात को मानती है और चुटकी लेती है। इसे सेटायर कहें या कमज़ोरी, आप खुद तय करें।

 टेक्निकल साइड – AI का सस्ता जुगाड़ और होंठ जो गाना भूल गए

अब बात करते हैं उस हिस्से की जो देखते ही आपकी आंखें चौंधिया जाएंगी – लेकिन अच्छे तरीके से नहीं। फिल्म के शुरुआती लोगो में ही AI जनरेटेड इमेज का इस्तेमाल किया गया है। वो भी ऐसा कि आपको तुरंत पता चल जाए। एक घोड़े वाला AI सीक्वेंस तो पूरी फिल्म में तीन बार दिखाया गया है, ताकि पैसा वसूल हो जाए। एडिटिंग भी कमाल की है – कई सीन में ऐसा लगता है कि एक्टर ने बाद में वॉइस नोट भेज दिया और एडिटर ने उसे सीन पर चिपका दिया। लिप-सिंक इतनी खराब है कि डबिंग आर्टिस्ट और एक्टर के बीच कोई तालमेल ही नहीं दिखता। जिस रिव्यूअर ने ये बताया, उन्होंने सही कहा कि ये सब मिलकर फिल्म को एक ‘बी-ग्रेड वेब सीरीज़’ का फील देता है।

 गाने – ‘ऊंचा लम्बा कद’ का रीमेक और एक भोजपुरी ट्रैक जो काम आया

‘वेलकम’ फ्रेंचाइज़ी का म्यूजिक हमेशा से हिट रहा है, लेकिन यहां हालत पतली है। फिल्म में ‘ऊंचा लम्बा कद’ का रीमेक है, जो 2007 में अक्षय पर ही फिल्माया गया था। आज 2025 में भी वो उसी गाने पर थिरक रहे हैं – ये उनकी लॉन्जीविटी की तारीफ है या क्रिएटिविटी की कमी, ये आप सोचिए। ज्यादातर गाने फिल्म को आगे बढ़ाने के बजाय ब्रेक का काम करते हैं। Yogi Bolta Hai ने तो यहां तक कहा कि “एक भोजपुरी गाने को छोड़कर किसी गाने की ज़रूरत नहीं थी” – वो गाना कम से कम एक किरदार को एस्टैब्लिश करता है। बाकी गाने ‘स्किप बटन’ की दुआ मांगने पर मजबूर करते हैं।

 कॉमेडी और सेटायर – बॉलीवुड का मज़ाक उड़ाने निकले, खुद पिट गए

फिल्म का दावा है कि वो बॉलीवुड की कमरशियल फिल्मों का मज़ाक उड़ाती है। स्क्रिप्ट के मुताबिक ये ‘सेटायर’ है, लेकिन सच्चाई ये है कि जो चीज़ आप खुद भुगत रहे हैं, उसका मज़ाक उड़ाना ‘एस्केप’ नहीं, बल्कि ‘सेल्फ-डिस’ बन जाता है। जब एक फिल्म AI घोड़े दिखाती है और खराब लिप-सिंक करती है, तो उसका खुद का एक्ज़ीक्यूशन इतना कमज़ोर है कि सेटायर का चैलेंज उल्टा उसी पर पड़ता है। एक रिव्यूअर ने तंज किया कि “बॉलीवुड की बुरी फिल्मों का मज़ाक उड़ाने का सबसे अच्छा तरीका है – पहले खुद अच्छी बनो।”

हां, कुछ रेफरेंसेस अच्छे हैं। महाभारत, बजरंगी भाईजान और पुरानी ‘वेलकम’ के स्पूफ्स काम कर जाते हैं। लेकिन ये चंद पल ही फिल्म को बचा पाते हैं।

 फैमिली ऑडियंस के लिए गुड न्यूज़ – बिल्कुल क्लीन और नॉन-क्रिंज

यहां एक बात तारीफ की हक़दार है – फिल्म पूरी तरह फैमिली-फ्रेंडली है। इसमें कोई वल्गैरिटी नहीं, कोई डबल मीनिंग जोक नहीं जो परिवार के साथ देखते हुए शर्मिंदा करे। Yogi Bolta Hai ने इसके लिए अलग से आधा स्टार एक्स्ट्रा दिया। यानी आप मम्मी-पापा, बच्चों और दादी के साथ बैठकर फिल्म देख सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि कहानी में लॉजिक ढूंढने पर टोका-टाकी शुरू हो सकती है।

 क्या देखनी चाहिए? – आपके मूड पर डिपेंड करता है

अगर आप… 
सिर्फ टाइम पास चाहते हैं 
वेलकम 1 और 2 के फैन हैं 
बिना दिमाग लगाए हंसने का मूड है 
फैमिली के साथ मूवी नाइट प्लान कर रहे हैं 
तो आपको ये फिल्म पसंद आ सकती है – लेकिन उम्मीदें बहुत ज़्यादा मत रखिए।

अगर आप… 
शानदार कॉमेडी के भूखे हैं 
पुरानी ‘वेलकम’ का जादू ढूंढ रहे हैं 
टेक्निकली अच्छी फिल्मों के शौकीन हैं 
हर सीन में लॉजिक चाहते हैं 
तो बेहतर है कि आप इस ‘जंगल’ का सफर न करें।

 फाइनल वर्डिक्ट – कितने सितारे?

अगर हम दोनों रिव्यूअर्स की राय का एवरेज निकालें तो फिल्म 2.75 से 3 स्टार के बीच बैठती है। Yogi Bolta Hai ने 3.5 स्टार दिए (0.5 क्लीन एंड नॉन-क्रिंज होने के लिए अलग से) जबकि दूसरे रिव्यूअर ने इसे ‘बहुत एवरेज’ करार दिया। हमारी सलाह: अगर ट्रेलर देखकर आपका दिल कह रहा है कि “चलो एक बार देख ही लेते हैं,” तो ज़रूर जाइए – पर अपना दिमाग और लॉजिक पार्किंग में छोड़कर।

अक्षय कुमार का कमबैक और कुछ रेफरेंस आपको गुदगुदाएंगे, लेकिन ‘वेलकम टू द जंगल’ वो क्लासिक कभी नहीं बन पाएगी जो ‘वेलकम’ 2007 में बनी थी। ये बस एक ‘वेलकम ड्रिंक’ है – ठंडी है, मीठी है, पर नशा नहीं है।

इस रिव्यू को तैयार करने में हमने दो YouTube चैनलों के डिटेल्ड एनालिसिस का सहारा लिया है। अगर आपको उनका कंटेंट पसंद आए, तो उन्हें ज़रूर फॉलो करें। (Names: Yogi Bolta Hai एवं एक और चर्चित रिव्यूअर जिन्होंने फिल्म की टेक्निकल खामियां बताईं।)

क्या आपने वेलकम 3 देखी? नीचे कमेंट में ज़रूर बताएं – आपको मज़ा आया या आपने ‘अलविदा’ कह दिया?

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